अरमान बहुत हैं

अरमान बहुत हैं

armaan

खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं ।
जिसे भी देखो, परेशान बहुत है ।।

 

करीब से देखा तो, निकला रेत का घर ।
मगर दूर से इसकी, शान बहुत है ।।

 

कहते हैं सच का, कोई मुकाबला नहीं ।
मगर आज झूठ की, पहचान बहुत है ।।

 

मुश्किल से मिलता है, शहर में आदमी ।
यूं तो कहने को, इन्सान बहुत हैं ।।

 

Shared by: Komal Sharma

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