बचपन

बचपन

bachpan

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे ,तो मेरा बचपन दिला जरा |

फिर से अपने छोटे पाओं से मुझे घर घूम आना है |

अपने छोटी सी मुस्कानसे सबको फिरसे खुश करना है |

इस बड़े हो गए दिल को छोटा करदे जरा |

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे ,तो मेरा बचपन दिला जरा ||

फिरसे उस सावन मे बेधूंद होके नाचना है |

मचलते हुए नदी के पानी में फिर से अपनी कागज की नांव छोड़ना है |

बगीचे के वो झूले पे झूलने दे जरा |

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे ,तो मेरा बचपन दिला जरा ||

स्कूल में दोस्ते के साथ फिरसे बर्फ के गोले खाने है |

और गाँव के तालाब में बेफिक्र गोते लगाने है |

चिड़िया का वो चहकना सुनने दे जरा |

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे ,तो मेरा बचपन दिला जरा ||

मिटटी के खिलोने बनाके फिरसे उनसे खेलना है |

टूट गए खिलोने तो मन भरके रोना है |

बचपन की उन यादों में बहने दे जरा |

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे ,तो मेरा बचपन दिला जरा ||

बचपन के उस गली में फिरसे मुझे जाना है |

पुराने उन लम्हो को फिर से आंखो में बसाना है |

एक जैसी लगने वाली इस ज़िन्दगी से फुरसत दिला जरा |

ए दाता देना ही है अगर कुछ मुझे ,तो मेरा बचपन दिला जरा ||

किरण कृष्णा जंगम

3 Replies to “बचपन”

  1. Manasi Devkar says:

    मस्तच…👌

  2. Kiran krishna jangam says:

    Thank you bookfever for this…

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