शब्द

शब्द

shabd

शब्द…..!!

कहीं कुतरे-कुतरे
कहीं कतरे-कतरे

 

कहीं भुने हुये
कहीं घुने हुये
कहीं कच्चे से
वो भी चुने हुये..

 

कहीं अड़ियल से
कहीं सड़ियल से
कुछ पके-पके
वो मरियल से..

 

मिले कहीं कहीं
कुछ खरे-खरे
निकले वो भी
अधकचरे….

 

पहर-पहर
भर रहा जहर
शब्द-शब्द
ढा रहा कहर

 

अमृत शब्दों के मरे-मरे
कुतरे-कुतरे कतरे-कतरे..

 

Shubhendra Jaiswal

 

One Reply to “शब्द”

  1. iss tarah ki vyakhya aaj tak sunne ko nahi mili shabd ke baare mein, waah laajawaab likha hai…

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